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Al-Hijr
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The Rocky Tract
अल्लाह ने पूछा : ऐ इबलीस! तुझे क्या हुआ कि तू सजदा करने वालों में शामिल नहीं हुआॽ
उसने कहा : मैं ऐसा नहीं कि एक मनुष्य को सजदा करूँ, जिसे तूने सड़े हुए गारे की खनखनाती मिट्टी से पैदा किया है।
अल्लाह ने कहा : फिर तू यहाँ से निकल जा। क्योंकि निश्चय तू धिक्कारा हुआ है।
और निःसंदेह तुझपर बदले (क़ियामत) के दिन तक धिक्कार है।
उस (इबलीस) ने कहा1 : ऐ मेरे पालनहार! तो फिर मुझे उस दिन तक मोहलत दे, जब वे (पुनः जीवित कर) उठाए जाएँगे।
(अल्लाह ने) कहा : तू निःसंदेह मोहलत दिए गए लोगों में से है।
ज्ञात समय के दिन तक।
वह बोला : ऐ मेरे पालनहार! चूँकि तूने मुझे पथभ्रष्ट किया है, मैं अवश्य ही उनके लिए धरती में (पाप को) सुशोभित करूँगा और उन सभी को पथभ्रष्ट कर दूँगा।
सिवाय तेरे उनमें से चुने हुए बंदों के।
(अल्लाह ने) कहा : यह रास्ता है जो मुझ तक सीधा है।
निःसंदेह मेरे बंदों पर तेरा कोई वश नहीं1, परंतु जो बहके हुए लोगों में से तेरे पीछे चले।
और निश्चय ही उन सब के वादा की जगह जहन्नम है।
उस (जहन्नम) के सात द्वार हैं। और प्रत्येक द्वार के लिए उन (इबलीस के अनुयायियों) का एक विभाजित भाग1 है।
निःसंदेह आज्ञाकारी लोग जन्नतों तथा स्रोतों में होंगे।
(उनसे कहा जाएगा :) इसमें सलामती के साथ निर्भय होकर प्रवेश कर जाओ।
और हम निकाल देंगे उनके दिलों में जो कुछ द्वेष होगा। वे भाई-भाई होकर एक-दूसरे के आमने-सामने तख़्तों पर (बैठे) होंगे।
न उसमें उन्हें कोई थकान होगी और न वे वहाँ से निकाले जाएँगे।
(ऐ नबी!) आप मेरे बंदों को सूचित कर दें कि निःसंदेह मैं ही बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दयावान्1 हूँ।
और यह भी कि निःसंदेह मेरी यातना ही कष्टदायक यातना है।
और आप उन्हें इबराहीम (अलैहिस्सलाम) के अतिथियों के बारे में सूचित कर दें।
सूरह समाप्त
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بِسْمِ ٱللَّهِ