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Taha
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Ta-Ha
और मैंने तुझे चुन1 लिया है। अतः ध्यान से सुन, जो वह़्य की जा रही है।
निःसंदेह मैं ही अल्लाह हूँ, मेरे सिवा कोई पूज्य नहीं, तो मेरी ही इबादत कर तथा मेरे स्मरण (याद) के लिए नमाज़ स्थापित कर।1
निश्चय क़ियामत आने वाली है, मैं क़रीब हूँ कि उसे छिपाकर रखूँ। ताकि प्रत्येक प्राणी को उसका बदला दिया जाए, जो वह प्रयास करता है।
अतः तुझे उससे वह व्यक्ति कहीं रोक न दे, जो उसपर ईमान (विश्वास) नहीं रखता और अपनी इच्छा के पालन में लगा है, अन्यथा तेरा नाश हो जाएगा।
और ऐ मूसा! यह तेरे दाहिने हाथ में क्या है?
उसने कहा : यह मेरी लाठी है। मैं इसपर टेक लगाता हूँ और इससे अपनी बकरियों के लिए पत्ते झाड़ता हूँ और मेरे लिए इसमें और भी कई ज़रूरतें हैं।
फरमाया : इसे फेंक दे, ऐ मूसा!
तो उसने उसे फेंक दिया और सहसा वह एक साँप था, जो दोड़ रहा था।
फरमाया : इसे पकड़ ले और डर मत, जल्द ही हम इसे इसकी प्रथम स्थिति में लौटा देंगे।
और अपना हाथ अपनी कांख (बग़ल) की ओर लगा दे, वह बिना किसी दोष के सफेद (चमकता हुआ) निकलेगा, जबकि यह एक और निशानी है।
ताकि हम तुझे अपनी कुछ बड़ी निशानियाँ दिखाएँ।
फ़िरऔन के पास जा, निश्चय वह सरकश हो गया है।
उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरे लिए मेरा सीना खोल दे।
तथा मेरे लिए मेरा काम सरल कर दे।
और मेरी ज़बान की गाँठ खोल दे।
ताकि वे मेरी बात समझ लें।
तथा मेरे लिए मेरे अपने घरवालों में से एक सहायकबना दे।
हारून को, जो मेरा भाई है।
उसके साथ मेरी पीठ मज़बूत़ कर दे।
और उसे मेरे काम में शरीक कर दे।
ताकि हम तेरी बहुत ज़्यादा पवित्रता बयान करें।
तथा हम तुझे बहुत ज़्यादा याद करें।
निःसंदेह तू हमेशा हमारी स्थिति को भली प्रकार देखने वाला है।
फरमाया : निःसंदेह तुझे दिया गया जो तूने माँगा, ऐ मूसा!
और निश्चय ही हमने तुझपर एक और बार भी उपकार किया।1
सूरह समाप्त
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पूर्वावलोकन
بِسْمِ ٱللَّهِ