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Al-Anbya
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The Prophets
वे उस (जहन्नम) की आहट भी नहीं सुनेंगे, और वे अपनी मनचाही चीज़ों में सदा रहने वाले हैं।
उन्हें सबसे बड़ी घबराहट दुःखित नहीं करेगी, तथा फ़रिश्ते उनका स्वागत करेंगे (और कहेंगे :) यह है तुम्हारा वह दिन, जिसका तुम्हें वचन दिया जाता था।
जिस दिन हम आकाश को पंजिका के पन्नों को लपेटने की तरह लपेट1 देंगे। जिस तरह हमने प्रथम सृष्टि का आरंभ किया, (उसी तरह) हम उसे लौटाएँगे।2 यह हमारे ज़िम्मे वादा है। निश्चय हम इसे पूरा करने वाले हैं।
तथा निःसंदेह हमने 'लौहे महफ़ूज़' (में लिखने) के बाद अवतरित पुस्तकों1 में लिख दिया कि धरती के उत्तराधिकारी मेरे सदाचारी बंदे होंगे।
निःसंदेह इबादत करने वालों के लिए इसमें एक बड़ा संदेश है।
और (ऐ नबी!) हमने आपको समस्त संसार के लिए दया1 बनाकर भेजा है।
(ऐ रसूल!) आप कह दें कि मेरी ओर केवल यही वह़्य की जाती है कि तुम्हारा पूज्य केवल एक ही पूज्य है। तो क्या तुम आज्ञाकारी1 बनते हो?
फिर अगर वे मुँह फेरें, तो (ऐ रसूल!) आप कह दें कि मैंने तुम्हें इस प्रकार सावधान1 कर दिया है कि (हम और तुम इसकी जानकारी में) बराबर हैं। और मैं नहीं जानता कि जिस (यातना) का तुम्हें वचन दिया जा रहा है, वह क़रीब है अथवा दूर।
निःसंदेह वह ऊँची आवाज़ से कही हुई बात को जानता है और वह भी जानता है जो तुम छिपाते हो।
और मैं नहीं जानता शायद यह1 तुम्हारे लिए एक परीक्षा हो और एक समय तक कुछ लाभ उठाना हो।
उस (नबी) ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! सत्य के साथ फ़ैसला कर दे। और हमारा पालनहार ही वह अत्यंत दयावान् है, जिससे उन बोतों पर सहायता माँगी जाती है, जो तुम बयान करते हो।
सूरह समाप्त
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بِسْمِ ٱللَّهِ