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Ash-Shu'ara
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The Poets
और बाद में आने वालों में मुझे सच्ची ख्याति प्रदान कर।
और मुझे नेमतों वाली जन्नत के वारिसों में से बना दे।
तथा मेरे बाप को क्षमा कर दे।1 निश्चय वह गुमराहों में से था।
तथा मुझे रुसवा न कर, जिस दिन लोग उठाए जाएँगे।1
जिस दिन न कोई धन लाभ देगा और न बेटे।
परंतु जो अल्लाह के पास पाक-साफ़ दिल लेकर आया।
और (अपने रब से) डरने वालों के लिए जन्नत निकट लाई जाएगी।
तथा पथभ्रष्ट लोगों के लिए भड़कती आग प्रकट कर दी जाएगी।
तथा उनसे कहा जाएगा : कहाँ हैं वे, जिन्हें तुम पूजते थे?
अल्लाह के सिवा। क्या वे तुम्हारी मदद करते हैं, या अपनी रक्षा करते हैं?
फिर वे और सब पथभ्रष्ट लोग उसमें औंधे मुँह फेंक दिए जाएँगे।
और इबलीस की समस्त सेनाएँ भी।
वे उसमें आपस में झगड़ते हुए कहेंगे :
अल्लाह की क़सम! निःसंदेह हम निश्चय खुली गुमराही में थे।
जब हम तुम्हें सारे संसारों के पालनहार के बराबर ठहराते थे।
और हमें तो सिर्फ़ इन अपराधियों ने गुमराह किया।
अब न हमारे लिए कोई सिफारिश करने वाले हैं।
और न कोई घनिष्ट मित्र।
तो यदि वास्तव में हमारे लिए वापस जाने का अवसर होता, तो हम ईमानवालों में से हो जाते।1
निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर ईमानवाले नहीं थे।
और निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली,1 अत्यंत दयावान् हैl
नूह़ की जाति ने रसूलों को झुठलाया।
जब उनसे उनके भाई नूह़ ने कहा : क्या तुम डरते नहीं?
निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।1
अतः तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।
मैं इस (कार्य) पर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता। मेरा बदला तो केवल सारे संसारों के पालनहार पर है।
अतः तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।
उन्होंने कहा : क्या हम तुझपर ईमान ले आएँ, जबकि तेरे पीछे चलने वाले अत्यंत नीच1 लोग हैं?
सूरह समाप्त
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पूर्वावलोकन
بِسْمِ ٱللَّهِ