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Ash-Shu'ara
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The Poets
(नूह़ ने) कहा : मूझे क्या मालूम कि वे क्या कर्म करते रहे हैं?
उनका ह़िसाब तो मेरे पालनहार ही के ज़िम्मे है, यदि तुम समझो।
और मैं ईमान वालों को धुतकारने वाला1 नहीं हूँ।
मैं तो बस एक खुला डराने वाला हूँ
उन्होंने कहा : ऐ नूह़! यदि तू बाज़ नहीं आया, तो अवश्य संगसार किए गए लोगों में से हो जाएगा।
उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! निःसंदेह मेरी जाति ने मुझे झुठला दिया!
अतः तू मेरे और उनके बीच दो-टूक निर्णय कर दे, तथा मुझे और जो ईमानवाले मेरे साथ हैं, उन्हें बचा ले।
तो हमने उसे और उन लोगों को जो उसके साथ भरी हुई नाव में थे, बचा लिया।
फिर उसके बाद शेष लोगों को डुबो दिया।
निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर ईमानवाले नहीं थे।
और निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् है।
आद ने रसूलों को झुठलाया।
जब उनसे उनके भाई हूद1 ने कहा : क्या तुम डरते नहीं हो?
निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।
अतः तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।
मैं इस (कार्य) पर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता, मेरा बदला तो केवल सारे संसारों के पालनहार पर है।
क्या तुम हर ऊँचे स्थान पर एक स्मारक बनाते हो? इस स्थिति में कि व्यर्थ कार्य करते हो।
तथा बड़े-बड़े भवन बनाते हो, शायद कि तुम सदा जीवित रहोगे।
और जब तुम पकड़ते हो, तो बड़ी निर्दयता से पकड़ते हो।
अतः अल्लाह से डरो और जो मैं कहता हूँ, उसे मानो।
तथा उससे डरो जिसने उन चीज़ों से तुम्हारी मदद की, जिन्हें तुम जानते हो।
उसने चौपायों और बेटों से तुम्हारी मदद की।
तथा बाग़ों और जल स्रोताें से।
निश्चय ही मैं तुमपर एक बड़े दिन की यातना से डरता हूँ।
उन्होंने कहा : हमारे लिए बराबर है कि तू नसीहत करे, या नसीहत करने वालों में से हो।
सूरह समाप्त
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بِسْمِ ٱللَّهِ