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Ash-Shu'ara
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The Poets
यह तो केवल पहले लोगों की आदत है।1
और हम निश्चित रूप से दंडित नहीं होंगे।
तो उन्होंने उसे झुठला दिया, तो हमने उन्हें विनष्ट कर दिया। निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर लोग ईमानवाले नहीं थे।
तथा निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् है।
समूद ने रसूलों1 को झुठलाया।
जब उनसे उनके भाई सालेह़ ने कहा : क्या तुम डरते नहीं हो?
निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।
अतः अल्लाह से डरो और जो मैं कहता हूँ, उसका पालन करो।
मैं इसपर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता। मेरा बदला तो केवल सारे संसारों के पालनहार पर है।
क्या तुम उन चीज़ों में जो यहाँ हैं, निश्चिंत छोड़ दिए जाओगे?
बाग़ों तथा स्रोतों में।
तथा खेतों और खजूर के पेड़ों में, जिनके फल मुलायम और पके हुए हैं।
तथा तुम पर्वतों को काटकर बड़ी निपुणता के साथ घर बनाते हो।
अतः अल्लाह से डरो और मेरा आज्ञापालन करो।
और हद से आगे बढ़ने वालों का हुक्म न मानो।
जो धरती में बिगाड़ पैदा करते हैं और सुधार नहीं करते।
उन्होंने कहा : निःसंदेह तू उन लोगों में से है जिनपर प्रबल जादू किया गया है।
तू तो बस हमारे ही जैसा एक मनुष्य है। अतः कोई निशानी ले आ, यदि तू सच्चों में से है।
उसने कहा : यह एक ऊँटनी1 है। इसके लिए पानी पीने की एक बारी है और तुम्हारे लिए एक निश्चित दिन पानी पीने की बारी है।
तथा उसे किसी बुराई से हाथ न लगाना, अन्यथा तुम्हें एक बड़े दिन की यातना पकड़ लेगी।
तो उन्होंने उसकी कूँचें काट दीं, फिर पछताने वाले हो गए।
तो उन्हें यातना ने पकड़ लिया। निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर ईमानवाले नहीं थे।
और निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् है।
सूरह समाप्त
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