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Ash-Shu'ara
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The Poets
और उससे डरो, जिसने तुम्हें तथा पहले लोगों को पैदा किया है।
उन्होंने कहा : निःसंदेह तू तो उन लोगों में से है जिनपर ताक़तवर जादू किया गया है।
और तू तो बस हमारे ही जैसा एक मनुष्य1 है और निःसंदेह हम तो तुझे झूठों में से समझते हैं।
तो हम पर आसमान से कुछ टुकड़े गिरा दे, यदि तू सच्चों में से है।
उसने कहा : मेरा पालनहार अधिक जानने वाला है जो कुछ तुम कर रहे हो।
चुनाँचे उन्होंने उसे झुठला दिया। तो उन्हें छाया1 के दिन की यातना ने पकड़ लिया। निश्चय वह एक बड़े दिन की यातना थी।
निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर ईमानवाले नहीं थे।
और निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् है।
तथा निःसंदेह, यह (क़ुरआन) निश्चय सारे संसारों के पालनहार का उतारा हुआ है।
इसे रूह़ुल-अमीन1 (अत्यंत विश्वसनीय फ़रिश्ता) लेकर उतरा है।
आपके दिल पर, ताकि आप सावधान करने वालों में से हो जाएँ।
स्पष्ट अरबी भाषा में।
तथा निःसंदेह यह निश्चित रूप से पहले लोगों की पुस्तकों में मौजूद है।1
क्या उनके लिए यह एक निशानी न थी है कि इसे बनी इसराईल के विद्वान1 जानते हैं।
और यदि हम इसे ग़ैर-अरब1 लोगों में से किसी पर उतार देते।
फिर वह इसे उनके सामने पढ़ता, तो भी वे उसपर ईमान लाने वाले न होते।1
इसी प्रकार हमने इसे अपराधियों के हृदयों में प्रवेश कर दिया।
वे उसपर ईमान नहीं लाएँगे, यहाँ तक कि वे दर्दनाक यातना देख लें।
तो वह उनपर अचानक आ पड़े और वे सोचते भी न हों।
फिर वे कहें : क्या हम मोहलत दिए जाने वाले हैं
तो क्या वे हमारी यातना के लिए जल्दी मचा रहे हैं?
तो क्या आपने विचार किया यदि हम इन्हें कुछ वर्षों तक लाभ दें।
फिर उनपर वह (यातना) आ जाए, जिसका उनसे वादा किया जाता था।
सूरह समाप्त
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