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Ash-Shu'ara
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The Poets
तो उन्हें जो लाभ दिया जाता था, वह उनके किस काम आएगा?
और हमने किसी बस्ती को विनष्ट नहीं किया, परंतु उसके लिए कई सावधान करने वाले थे।
याद दिलाने के लिए। और हम अत्याचारी नहीं थे।
तथा इस (क़ुरआन) को लेकर शैतान नहीं उतरे।
और न यह उनके योग्य है, और न वे ऐसा कर सकते हैं।
निःसंदेह वे तो (इसके) सुनने ही से अलग1 कर दिए गए हैं।
अतः आप अल्लाह के साथ किसी अन्य पूज्य को न पुकारें, अन्यथा आप दंड पाने वालों में हो जाएँगे।
और आप अपने निकटतम रिश्तेदारों को डराएँ।1
और ईमान वालों में से जो आपका अनुसरण करे, उसके लिए अपना बाज़ू1 झुका दें।
फि यदि वे आपकी अवज्ञा करें, तो आप कह दें कि तुम जो कुछ कर रहे हो उसकी ज़िम्मेदारी से मैं बरी हूँ।
तथा उस सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् पर भरोसा करें।
जो आपको देखता है, जब आप खड़े होते हैं।
और सजदा करने वालों में आपके फिरने को भी।1
निःसंदेह वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
क्या मैं आपको बताऊँ कि शैतान किस पर उतरते हैं?
वे हर बड़े झूठे और बड़े पापी1 पर उतरते हैं।
वे सुनी हुई बात को (काहिनों तक) पहुँचा देते हैं, और उनमें से अधिकतर झूठे हैं।
और कवि लोग, उनके पीछे भटके हुए लोग ही चलते हैं।
क्या आपने नहीं देखा कि वे प्रत्येक वादी में भटकते फिरते1 हैं।
और यह कि निःसंदेह ऐसी बात कहते हैं, जो करते नहीं।
सिवाय उन (कवियों) के, जो1 ईमान लाए, और अच्छे कर्म किए और अल्लाह को बहुत याद किया तथा बदला लिया, इसके बाद कि उनके ऊपर ज़ुल्म किया गया। तथा वे लोग, जिन्होंने अत्याचार किया, शीघ्र ही जान लेंगे कि वे किस जगह लौटकर जाएँगे।
सूरह समाप्त
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بِسْمِ ٱللَّهِ