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As-Saffat
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Those who set the Ranks
तुम्हें क्या हुआ कि तुम एक-दूसरे की सहायता नहीं करते?
बल्कि, आज वे सर्वथा आज्ञाकारी हैं।
और वे एक-दूसरे की ओर रुख़ करके परस्पर प्रश्न करेंगे।1
वे कहेंगे : निःसंदेह तुम हमारे पास दाहिने1 से आया करते थे।
वे1 कहेंगे : बल्कि तुम (स्वयं) ईमान वाले न थे।
तथा हमारा तुमपर कोई ज़ोर1 न था, बल्कि तुम (स्वंय) हद से बढ़ने वाले लोग थे।
तो हमपर हमारे पालनहार का कथन सिद्ध हो गया। निःसंदेह हम निश्चय (यातना) चखने वाले हैं।
तो हमने तुम्हें गुमराह किया। निःसंदेह हम स्वयं गुमराह थे।
तो निश्चय ही वे उस दिन यातना में सहभागी होंगे।
निःसंदेह हम अपराधियों के साथ ऐसा ही किया करते हैं।
निःसंदेह वे ऐसे लोग थे कि जब उनसे कहा जाता कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य (इबादत के योग्य) नहीं, तो वे अभिमान करते थे।
तथा कहते थे : क्या सचमुच हम अपने पूज्यों को एक दीवाने कवि के कारण छोड़ देने वाले हैं?
बल्कि वह सत्य लेकर आए हैं तथा उन्होंने सभी रसूलों की पुष्टि की है।
निःसंदेह तुम निश्चय दुःखदायी यातना चखने वाले हो।
तथा तुम्हें केवल उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम किया करते थे।
परंतु अल्लाह के ख़ालिस (विशुद्ध) किए हुए बंदे।
यही लोग हैं, जिनके लिए निर्धारित रोज़ी है।
प्रत्येक प्रकार के फल। तथा वे सम्मानित किए गए हैं।
नेमत के बाग़ों में।
तख़्तों पर आमने-सामने बैठे होंगे।
उनपर प्रवाहित शराब के प्याले फिराए जाएँगे।
जो सफ़ेद होगी, पीने वालों के लिए स्वादिष्ट होगी।
न उसमें कोई सिरदर्द होगा, और न वे उससे मदहोश होंगे।
तथा उनके पास दृष्टि नीची रखने वाली, बड़ी आँखों वाली स्त्रियाँ होंगी।
मानो वे छिपाकर रखे हुए अंडे हों।1
फिर वे एक-दूसरे के सम्मुख होकर आपस में प्रश्न करेंगे।
उनमें से एक कहने वाला कहेगा : मेरा एक साथी था।
सूरह समाप्त
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بِسْمِ ٱللَّهِ