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As-Saffat
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Those who set the Ranks
वह कहा करता था कि क्या सचमुच तू भी (मरणोपरांत पुनर्जीवन को) मानने वालों में से है?
क्या जब हम मर गए और हम मिट्टी तथा हड्डियाँ हो गए, तो क्या सचमुच हम अवश्य बदला दिए जाने वाले हैं?
वह कहेगा : क्या तुम झाँककर देखने वाले हो?
फिर वह झाँकेगा, तो उसे भड़कती हुई आग के बीच में देखेगा।
कहेगा : अल्लाह की कसम! निश्चय तू क़रीब था कि मुझे नष्ट ही कर दे।
और यदि मेरे पालनहार की अनुकंपा न होती, तो निश्चय मैं भी (जहन्नम में) उपस्थित किए गए लोगों में से होता।
तो क्या (यह सही नहीं है) कि हम कभी मरने वाले नहीं हैं?
सिवाय अपनी प्रथम मौत के, और न हम कभी यातना दिए जाने वाले हैं।
निश्चय यही तो बहुत बड़ी सफलता है।
इसी (जैसी सफलता) के लिए कर्म करने वालों को कर्म करना चाहिए।
क्या यह आतिथ्य उत्तम है या थोहड़ का वृक्ष?
निःसंदेह हमने उसे अत्याचारियों के लिए एक परीक्षा बनाया है।
निःसंदेह वह ऐसा वृक्ष है, जो जहन्नम के तल में उगता है।
उसके गुच्छे ऐसे हैं मानो वे शैतानों के सिर हों।
तो वे (जहन्नमवासी) निश्चय उसमें से खाने वाले हैं। फिर उससे पेट भरने वाले हैं।
फिर निःसंदेह उनके लिए उसपर खौलते हुए पानी का मिश्रण है।
फिर निःसंदेह उनकी वापसी निश्चय उसी भड़कती हुई आग की ओर होगी।
निःसंदेह उन्होंने अपने बाप-दादा को गुमराह पाया।
तो वे उन्हीं के पदचिह्नों पर दौड़े चले जा रहे हैं।1
और निःसंदेह इनसे पहले अगले लोगों में से अधिकतर लोग गुमराह हो चुके हैं।
तथा निःसंदेह हमने उनके अंदर कई डराने वाले भेजे।
तो देखो कि उन डराए जाने वालों का परिणाम1 कैसा हुआ?
सिवाय अल्लाह के ख़ालिस किए हुए बंदों के।
तथा निःसंदेह नूह ने हमें पुकारा, तो निश्चय हम अच्छे स्वीकार करने वाले हैं।
और हमने उसे और उसके घर वालों को बहुत बड़ी आपदा से बचा लिया।
सूरह समाप्त
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पूर्वावलोकन
بِسْمِ ٱللَّهِ