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Adh-Dhariyat
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The Winnowing Winds
क़सम है रास्तों वाले आकाश की!
निःसंदेह तुम निश्चय एक विवादास्पद बात1 में पड़े हो।
उससे वही फेरा जाता है, जो (अल्लाह के ज्ञान में) फेर दिया गया है।
अटकल लगाने वाले मारे गए।
जो बड़ी ग़फ़लत में भूले हुए हैं।
वे पूछते1 हैं कि बदले का दिन कब है?
जिस दिन वे आग पर तपाए जाएँगे।
अपने फ़ितने (यातना) का मज़ा चखो, यही है जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे थे।
निःसंदेह परहेज़गार लोग बाग़ों और जल स्रोतों में होंगे।
जो कुछ उनका रब उन्हें देगा, उसे वे लेने वाले होंगे। निश्चय ही वे इससे पहले नेकी करने वाले थे।
वे रात के बहुत थोड़े भाग में सोते थे।1
तथा रात्रि की अंतिम घड़ियों1 में वे क्षमा याचना करते थे।
और उनके धनों में माँगने वाले तथा वंचित1 के लिए एक हक़ (हिस्सा) था।
तथा धरती में विश्वास करने वालों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं।
तथा स्वयं तुम्हारे भीतर (भी)। तो क्या तुम नहीं देखते?
और आकाश ही में तुम्हारी रोज़ी1 है तथा वह भी जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है।
सो क़सम है आकाश एवं धरती के पालनहार की! निःसंदेह यह बात निश्चित रूप से सत्य है, इस बात की तरह कि निःसंदेह तुम बोलते हो।1
क्या आपके पास इबराहीम के सम्मानित अतिथियों की सूचना आई है?
जब वे उसके पास आए, तो उन्होंने सलाम कहा। उसने कहा : सलाम हो। कुछ अपरिचित लोग हैं।
फिर वह चुपके से अपने घरवालों के पास गया। फिर एक मोटा-ताज़ा (भुना हुआ) बछड़ा ले आया।
फिर उसे उनके सामने रख दिया। कहा : क्या तुम नहीं खाते?
तो उसने उनसे दिल में डर महसूस किया। उन्होंने कहा : डरो नहीं। और उन्होंने उसे एक बहुत ही ज्ञानी पुत्र की शुभ-सूचना दी।
यह सुनकर उसकी पत्नी चिल्लाती हुई आगे आई, तो उसने अपना चेहरा पीट लिया और बोली : बूढ़ी बाँझ!
उन्होंने कहा : तेरे पालनहार ने ऐसे ही फरमाया है। निश्चय वही पूर्ण हिकमत वाला, अत्यंत ज्ञानी है।
सूरह समाप्त
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पूर्वावलोकन
بِسْمِ ٱللَّهِ