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An-Najm
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The Star
क़सम है तारे की जब वह गिरे!
तुम्हारा साथी न तो रास्ते से भटका है और न ही गलत रास्ते पर चला है।
और न वह अपनी इच्छा से बोलता है।
वह तो केवल वह़्य है, जो उतारी जाती है।
उसे बहुत मज़ूबत शक्तियों वाले (फ़रिश्ते)1 ने सिखाया है।
जो बड़ा बलशाली है। फिर वह बुलंद हुआ (अपने असली रूप में प्रकट हुआ)।
जबकि वह आकाश के सबसे ऊँचे क्षितिज (पूर्वी किनारे) पर था।
फिर वह निकट हुआ और उतर आया।
फिर वह दो धनुषों की दूरी पर था, या उससे भी निकट।
फिर उसने अल्लाह के बंदे1 की ओर वह़्य की, जो भी वह़्य की।
दिल ने झूठ नहीं बोला, जो कुछ उसने देखा।
फिर क्या तुम उससे उसपर झगड़ते हो, जो वह देखता है?
हालाँकि, निश्चित रूप से उसने उसे एक और बार उतरते हुए भी देखा है।
सिदरतुल-मुनतहा'1 के पास।
उसी के पास 'जन्नतुल मावा' (शाश्वत स्वर्ग) है।
जब सिदरा पर छा रहा था, जो कुछ छा रहा था।1
न निगाह इधर-उधर हुई और न सीमा से आगे बढ़ी।
निःसंदेह उसने अपने पालनहार की कुछ बहुत बड़ी निशानियाँ1 देखीं।
फिर क्या तुमने लात और उज़्ज़ा को देखा।
तथा तीसरी एक और (मूर्ति) मनात को?1
क्या तुम्हारे लिए पुत्र हैं और उस (अल्लाह) के लिए पुत्रियाँ?
तब तो यह बड़ा अन्यायपूर्ण बँटवारा है।
ये (मूर्तियाँ) कुछ नामों के सिवा कुछ भी नहीं हैं, जो तुमने तथा तुम्हारे बाप-दादा ने रख लिए हैं। अल्लाह ने इनका कोई प्रमाण नहीं उतारा है। ये लोग केवल अटकल1 के और उन चीज़ों के पीछे चल रहे हैं जो उनके दिल चाहते हैं। जबकि निःसंदेह उनके पास उनके पालनहार की ओर से मार्गदर्शन आ चुका है।
क्या मनुष्य को वह मिल जाएगा, जिसकी वह कामना करे?
(नहीं, ऐसा नहीं है) क्योंकि आख़िरत और दुनिया अल्लाह ही के अधिकार में है।
और आकाशों में कितने ही फ़रिश्ते हैं कि उनकी सिफ़ारिश कुछ लाभ नहीं देती, परंतु इसके पश्चात कि अल्लाह अनुमति दे जिसके लिए चाहे तथा (जिसे) पसंद करे।1
सूरह समाप्त
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بِسْمِ ٱللَّهِ