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Al-Waqi'ah
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The Inevitable
फिर निःसंदेह तुम ऐ गुमराहो! झुठलाने वालो!
निश्चय ही ज़क़्क़ूम (थूहड़) के वृक्ष में से खाने वाले हो।1
फिर उससे अपने पेट भरने वाले हो।
फिर उसपर खौलते पानी से पीने वाले हो।
फिर पीने वाले हो प्यास की बीमारी वाले ऊँट1 के समान।
यह बदले के दिन उनकी मेहमाननवाज़ी है।
हमने ही तुम्हें पैदा किया, फिर तुम (पुनः जीवित किए जाने को) क्यों सच नहीं मानते?
तो क्या तुमने उस वीर्य पर विचार किया, जो तुम टपकाते हो?
क्या तुम उसे पैदा करते हो, या हम ही पैदा करने वाले हैं?
हम ही ने तुम्हारे बीच मृत्यु का समय निश्चित किया है और हम कदापि विवश नहीं हैं।
कि हम तुम्हारे रूप को परिवर्तित कर दें और तुम्हें ऐसी शक्ल-सूरत में पैदा कर दें, जिसे तुम नहीं जानते।
तथा निश्चय ही तुम पहली पैदाइश को जान चुके हो, फिर तुम नसीहत ग्रहण क्यों नहीं करते?
फिर क्या तुमने उसपर विचार किया जो कुछ तुम बोते हो?
क्या तुम उसे उगाते हो, या हम ही उगाने वाले हैं?
यदि हम चाहें, तो अवश्य उसे चूर-चूर कर दें, फिर तुम आश्चर्य करते रह जाओ।
कि निःसंदेह हमपर दाँड डाल दिया गया।
बल्कि हम वंचित हो गए हैं।
फिर क्या तुमने उस पानी पर विचार किया, जो तुम पीते हो?
क्या तुमने उसे बादल से उतारा है, या हम ही उतारने वाले हैं?
यदि हम चाहें, तो उसे अत्यंत खारा बना दें, फिर तुम शुक्र अदा क्यों नहीं करते?
फिर क्या तुमने उस आग पर विचार किया, जो तुम सुलगाते हो?
क्या तुमने उसके वृक्ष को पैदा किया है, या हम ही पैदा करने वाले हैं?
हमने ही उसे यात्रियों के लिए एक नसीहत तथा लाभ का सामान बनाया है।
अतः (ऐ नबी!) आप अपने महान पालनहार के नाम की तसबीह करें।
अतः नहीं! मैं सितारों के गिरने की जगहों की क़सम खाता हूँ!
और निःसंदेह यह निश्चय ऐसी क़सम है कि यदि तुम जानो तो बहुत बड़ी है।
सूरह समाप्त
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بِسْمِ ٱللَّهِ