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Al-Waqi'ah
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The Inevitable
निःसंदेह, यह निश्चित रूप से एक प्रतिष्ठित क़ुरआन है।
एक छिपाकर रखी हुई1 किताब में (अंकित) है।
इसे कोई नहीं छूता सिवाय उनके जो बहुत पवित्र किए गए हैं।1
यह सारे संसार के पालनहार की ओर से उतारा गया है।
फिर क्या तुम इस वाणी की उपेक्षा करने वाले हो?
तथा तुम (क़ुरआन से) अपना हिस्सा यह बनाते हो कि तुम (इसे) झुठलाते हो?
फिर क्यों नहीं जब वह (प्राण) गले को पहुँच जाता है।
और तुम उस समय देख रहे होते हो।
तथा हम तुमसे अधिक उसके निकट होते हैं, परंतु तुम नहीं देखते।
तो अगर तुम (किसी के) अधीन नहीं हैं तो क्यों नहीं।
तुम उसे वापस ले आते, यदि तुम सच्चे हो?
फिर यदि वह निकटवर्तियों में से है।
तो उसके लिए आराम और अच्छी जीविका और नेमतों से भरी जन्नत है।
और यदि वह दाहिने हाथ वालों में से है।
तो (कहा जाएगा) तेरे लिए सलामती है (कि तू) दाहिने हाथ वालों में से है।
और यदि वह व्यक्ति झुठलाने वाले गुमराहों में से है,
तो उसके लिए खौलते हुए पानी का अतिथि सत्कार है।
तथा जहन्नम की आग में जलना है।
निःसंदेह यक़ीनन यही है वह सत्य जो निश्चित है।
अतः आप अपने महान पालनहार के नाम की महिमा करें।
अल्लाह की पवित्रता का गान किया हर उस चीज़ ने जो आकाशों और धरती में है और वही सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
उसी के लिए आकाशों तथा धरती का राज्य है। वह जीवन प्रदान करता और मौत देता है। तथा वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
वही सबसे पहले है और सबसे आख़िर है और ज़ाहिर (दृश्यमान) है और पोशीदा (अदृश्य) है और वह हर चीज़ को भली-भाँति जानने वाला है।
सूरह समाप्त
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بِسْمِ ٱللَّهِ