पृष्ठ 577 देख रहे हैं
पृष्ठ 577 देख रहे हैं
Al-Muddaththir
.74
The Cloaked One
तो उन्हें सिफ़ारिश करने वालों की सिफ़ारिश लाभ नहीं देगी।1
तो उन्हें क्या हो गया है कि उपदेश से मुँह फेर रहे हैं?
जैसे वे सख़्त बिदकने वाले गधे हैं।
जो शेर से भागे हैं।
बल्कि उनमें से प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि उसे खुली पुस्तकें1 दी जाएँ।
ऐसा कदापि नहीं हो सकता, बल्कि वे आख़िरत से नहीं डरते।
हरगिज़ नहीं, निश्चय यह (क़ुरआन) एक उपदेश (याददेहानी) है।
अतः जो चाहे, उससे नसीहत प्राप्त करे।
और वे नसीहत प्राप्त नहीं कर सकते, परंतु यह कि अल्लाह चाहे। वही इस योग्य है कि उससे डरा जाए और वही इस योग्य है कि क्षमा करे।
मैं क़सम खाता हूँ क़ियामत के दिन1 की।
तथा मैं क़सम खाता हूँ निंदा1 करने वाली अंतरात्मा की।
क्या इनसान समझता है कि हम कभी उसकी हड्डियों को एकत्र नहीं करेंगे?
क्यों नहीं? हम इस बता का भी सामर्थ्य रखते हैं कि उसकी उंगलियों की पोर-पोर सीधी कर दें।
बल्कि मनुष्य चाहता है कि अपने आगे भी1 गुनाह करता रहे।
वह पूछता है कि क़ियामत का दिन कब होगा?
तो जब आँख चौंधिया जाएगी।
और चाँद को ग्रहण लग जाएगा।
और सूर्य और चाँद एकत्र1 कर दिए जाएँगे।
उस दिन मनुष्य कहेगा कि भागने का स्थान कहाँ है?
कदापि नहीं, शरण लेने का स्थान कोई नहीं।
उस दिन तेरे पालनहार ही की ओर लौटकर जाना है।
उस दिन इनसान को बताया जाएगा जो उसने आगे भेजा और जो पीछे छोड़ा।1
बल्कि इनसान स्वयं अपने विरुद्ध गवाह1 है।
अगरचे वह अपने बहाने पेश करे।
(ऐ नबी!) आप इसके साथ अपनी ज़ुबान न हिलाएँ1, ताकि इसे शीघ्र याद कर लें।
निःसंदेह उसको एकत्र करना और (आपका) उसे पढ़ना हमारे ज़िम्मे है।
अतः जब हम उसे पढ़ लें, तो आप उसके पठन का अनुसरण करें।
फिर निःसंदेह उसे स्पषट करना हमारे ही ज़िम्मे है।
सूरह समाप्त
The system theme automatically adapts to your light/dark mode settings
Quran.com की डिफ़ॉल्ट उथमानी शैली
पूर्वावलोकन
بِسْمِ ٱللَّهِ