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Al-Mursalat
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The Emissaries
क्या हमने तुम्हें एक तुच्छ पानी से पैदा नहीं किया?
फिर हमने उसे एक सुरक्षित ठिकाने में रखा।
एक ज्ञात अवधि तक।1
फिर हमने अनुमान1 लगाया, तो हम क्या ही अच्छा अनुमान लगाने वाले हैं।
उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
क्या हमने धरती को समेटने1 वाली नहीं बनाया?
जीवित और मृत लोगों को।
तथा हमने उसमें ऊँचे पर्वत बनाए और हमने तुम्हें मीठा पानी पिलाया।
उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
(कहा जाएगा :) उस चीज़ की ओर चलो, जिसे तुम झुठलाते थे।
एक छाया1 की ओर चलो, जो तीन शाखाओं वाली है।
जो न छाया देगी और न ज्वाला से बचाएगी।
निःसंदेह वह (आग) भवन के समान चिंगारियाँ फेंकेगी।
जैसे वे पीले ऊँट हों।
उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
यह वह दिन है कि वे बोल1 नहीं सकेंगे।
और न उन्हें अनुमति दी जाएगी कि वे उज़्र (कारण) पेश करें।
उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
यह निर्णय का दिन है। हमने तुम्हें और पहलों को एकत्र कर दिया है।
तो यदि तुम्हारे पास कोई चाल1 हो, तो मेरे विरुद्ध चलो।
उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
निश्चय डरने वाले लोग छाँवों तथा स्रोतों में होंगे।
तथा फलों में, जिसमें से वे चाहेंगे।
(तथा उनसे कहा जाएगा :) मज़े से खाओ और पियो, उसके बदले जो तुम किया करते थे।
हम सदाचारियों को इसी तरह बदला प्रदान करते हैं।
उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
(ऐ झुठलाने वालो!) तुम खा लो तथा थोड़ा-सा1 आनंद ले लो। निश्चय तुम अपराधी हो।
उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
तथा जब उनसे कहा जाता है कि (अल्लाह के आगे) झुको, तो वे नहीं झुकते।
उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश है।
फिर इस (क़ुरआन) के बाद वे किस बात पर ईमान1 लाएँगे?
सूरह समाप्त
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पूर्वावलोकन
بِسْمِ ٱللَّهِ