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At-Tin
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The Fig
क़सम है अंजीर की! तथा ज़ैतून की!
एवं "तूरे सीनीन" की क़सम!
और इस शान्ति वाले नगर की क़सम!
निःसंदेह हमने इनसान को सबसे अच्छी संरचना में पैदा किया है।
फिर हमने उसे सबसे नीची हालत की ओर लौटा दिया।
परंतु जो लोग ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए, उनके लिए समाप्त न होने वाला बदला है।
फिर (ऐ मनुष्य) तुझे कौन-सी चीज़ बदले (के दिन) को झुठलाने पर आमादा करती है?
क्या अल्लाह सब हाकिमों से बड़ा हाकिम नहीं है?
अपने पालनहार के नाम से पढ़, जिसने पैदा किया।
जिसने मनुष्य को रक्त के लोथड़े से पैदा किया।
पढ़ और तेरा पालनहार बड़े करम (उदारता) वाला है।
जिसने क़लम के द्वारा सिखाया।
उसने इनसान को वह सिखाया, जो वह नहीं जानता था।1
कदापि नहीं, निःसंदेह मनुष्य सीमा पार कर जाता है।
इसलिए कि वह स्वयं को बेनियाज़ (धनवान्) देखता है।
निःसंदेह, तेरे पालनहार ही की ओर वापस लौटना है।1
क्या आपने उस व्यक्ति को देखा, जो रोकता है।
एक बंदे को, जब वह नमाज़ अदा करता है।
क्या आपने देखा यदि वह सीधे मार्ग पर हो।
या अल्लाह से डरने का आदेश देता हो?
क्या आपने देखा यदि उसने झुठलाया तथा मुँह फेरा?1
क्या उसने नहीं जाना कि अल्लाह देख रहा है?
कदापि नहीं, निश्चय यदि वह नहीं माना, तो हम अवश्य उसे माथे की लट पकड़कर घसीटेंगे।
ऐसे माथे की लट जो झूठा और पापी है।
तो वह अपनी सभा को बुला ले।
हम भी जहन्नम के फ़रिश्तों को बुला लेंगे।1
कदापि नहीं, आप उसकी बात न मानें, (बल्कि) सजदा करें और (अल्लाह के) निकट हो जाएँ।1
सूरह समाप्त
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पूर्वावलोकन
بِسْمِ ٱللَّهِ