सूरह 20 देख रहे हैं
सूरह 20 देख रहे हैं
Taha
.20
Ta-Ha
ता, हा।
हमने आपपर यह क़ुरआन इसलिए नहीं अवतरित किया कि आप कष्ट में पड़ जाएँ।1
परंतु उसकी याददहानी (नसीहत) के लिए, जो डरता1 है।
उसकी ओर से उतारा हुआ है, जिसने पृथ्वी और ऊँचे आकाशों को बनाया।।
वह रहमान (अत्यंत दयावान् अल्लाह) अर्श (सिंहासन) पर बुलंद हुआ।
उसी का1 है, जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है और जो उन दोनों के बीच है तथा जो गीली मिट्टी के नीचे है।
यदि तुम उच्च स्वर में बात करो, तो वह गुप्त और उससे भी अधिक गुप्त बात को जानता है।
अल्लाह वह है जिसके सिवा कोई पूज्य नहीं, सबसे अच्छे नाम उसी के हैं।
और क्या (ऐ नबी!) आपके पास मूसा की ख़बर पहुँची?
जब उसने एक आग देखी, तो अपने घरवालों से कहा : ठहरो, निःसंदेह मैंने एक आग देखी है, शायद मैं तुम्हारे पास उससे कोई अंगार लाे आऊँ, अथवा उस आग पर कोई मार्गदर्शन पा लूँ।1
फिर जब वह उसके पास आया तो उसे आवाज़ दी गई : ऐ मूसा!
निःसंदेह मैं ही तेरा पालनहार हूँ, अतः अपने दोनों जूते उतार दे, निःसंदेह तू पवित्र वादी “तुवा” में है।
और मैंने तुझे चुन1 लिया है। अतः ध्यान से सुन, जो वह़्य की जा रही है।
निःसंदेह मैं ही अल्लाह हूँ, मेरे सिवा कोई पूज्य नहीं, तो मेरी ही इबादत कर तथा मेरे स्मरण (याद) के लिए नमाज़ स्थापित कर।1
निश्चय क़ियामत आने वाली है, मैं क़रीब हूँ कि उसे छिपाकर रखूँ। ताकि प्रत्येक प्राणी को उसका बदला दिया जाए, जो वह प्रयास करता है।
अतः तुझे उससे वह व्यक्ति कहीं रोक न दे, जो उसपर ईमान (विश्वास) नहीं रखता और अपनी इच्छा के पालन में लगा है, अन्यथा तेरा नाश हो जाएगा।
और ऐ मूसा! यह तेरे दाहिने हाथ में क्या है?
उसने कहा : यह मेरी लाठी है। मैं इसपर टेक लगाता हूँ और इससे अपनी बकरियों के लिए पत्ते झाड़ता हूँ और मेरे लिए इसमें और भी कई ज़रूरतें हैं।
फरमाया : इसे फेंक दे, ऐ मूसा!
तो उसने उसे फेंक दिया और सहसा वह एक साँप था, जो दोड़ रहा था।
फरमाया : इसे पकड़ ले और डर मत, जल्द ही हम इसे इसकी प्रथम स्थिति में लौटा देंगे।
और अपना हाथ अपनी कांख (बग़ल) की ओर लगा दे, वह बिना किसी दोष के सफेद (चमकता हुआ) निकलेगा, जबकि यह एक और निशानी है।
ताकि हम तुझे अपनी कुछ बड़ी निशानियाँ दिखाएँ।
फ़िरऔन के पास जा, निश्चय वह सरकश हो गया है।
उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरे लिए मेरा सीना खोल दे।
तथा मेरे लिए मेरा काम सरल कर दे।
और मेरी ज़बान की गाँठ खोल दे।
ताकि वे मेरी बात समझ लें।
तथा मेरे लिए मेरे अपने घरवालों में से एक सहायकबना दे।
हारून को, जो मेरा भाई है।
उसके साथ मेरी पीठ मज़बूत़ कर दे।
और उसे मेरे काम में शरीक कर दे।
ताकि हम तेरी बहुत ज़्यादा पवित्रता बयान करें।
तथा हम तुझे बहुत ज़्यादा याद करें।
निःसंदेह तू हमेशा हमारी स्थिति को भली प्रकार देखने वाला है।
फरमाया : निःसंदेह तुझे दिया गया जो तूने माँगा, ऐ मूसा!
और निश्चय ही हमने तुझपर एक और बार भी उपकार किया।1
जब हमने तेरी माँ की ओर वह़्य की, जो वह़्य की जाती थी।
यह कि तू इसे ताबूत (संदूक़) में रख दे, फिर उसे नदी में डाल दे, फिर नदी उसे किनारे पर डाल दे, उसे मेरा एक शत्रु और उसका शत्रु उठा लेगा1 और मैंने तुझपर अपनी ओर से एक प्रेम2 डाल दिया और ताकि तेरा पालन-पोषण मेरी आँखों के सामने किया जाए।
जब तेरी बहन1 चल रही थी और कह रही थी : क्या मैं तुम्हें उसका पता बता दूँ, जो इसका पालन-पोषण करे? फिर हमने तुझे तेरी माँ के पास लौटा दिया, ताकि उसकी आँख ठंडी हो और वह शोक न करे। तथा तूने एक आदमी को मार डाला2, तो हमने तुझे दुःखसे बचा लिया और हमने तुम्हारी अच्छी तरह से परीक्षा ली। फिर तू कई वर्ष मदयन वालों के बीच ठहरा रहा, फिर तू एक निश्चित अनुमान पर आया, ऐ मूसा!
और मैंने तुझे विशेष रूप से अपने लिए बनाया है।
तू और तेरा भाई मेरी निशानियाँ लेकर जाओ और मुझे याद करने में आलस्य न करो।
तुम दोनों फ़िरऔन के पास जाओ, निःसंदेह वह सरकश हो गया है।
तो उससे कोमल बात करो, आशा है कि वह उपदेश ग्रहण करे, या (अल्लाह से) डर जाए।
दोनों ने कहा : ऐ हमारे पालनहार! निश्चय ह डरते हैं कि वह हमपर अत्याचार करेगा, या हद से बढ़ जाएगा।
फरमाया : डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूँ, सब कुछ सुन रहा हूँ और सब कुछ देख रहा हूँ।
अतः तुम दोनों उसके पास जाओ और कहो : हम तेरे पालनहार के रसूल हैं। अतः तू हमारे साथ बनी इसराईल को भेज दे और उन्हें यातना न दे, निश्चय हम तेरे पास तेरे पालनहार की ओर से एक निशानी लेकर आए हैं और सलामती है उसके लिए, जो मार्गदर्शन का अनुसरण करे।
निःसंदेह हमारी ओर वह़्य (प्रकाशना) की गई है कि निश्चय ही यातना उसके लिए है, जिसने झुठलाया और मुँह फेरा।
उसने कहा : तुम दोनों का पालनहार कौन है, ऐ मूसा!?
(मूसा ने) कहा : हमारा पालनहार वह है, जिसने हर चीज़ को उसका आकार और रूप दिया, फिर रास्ता दिखाया।1
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