सूरह 37 देख रहे हैं
सूरह 37 देख रहे हैं
As-Saffat
.37
Those who set the Ranks
क़सम है पंक्तिबद्ध (फ़रिश्तों) की!
फिर झिड़क कर डाँटने वालों की!
फिर (अल्लाह के) ज़िक्र (वाणी) की तिलावत करने वालों की।1
निःसंदेह तुम्हारा पूज्य निश्चय एक ही है।
जो आकाशों और धरती का तथा उन दोनों के बीच की समस्त चीज़ों का स्वामी है और सूर्य के उदय होने के सभी स्थानों का मालिक है।
निःसंदेह हमने संसार के आकाश को एक सुंदर शृंगार के साथ सुशोभित किया है, जो सितारे हैं।
और प्रत्येक सरकश शैतान से सुरक्षित करने के लिए।
वे सर्वोच्च सभा (मला-ए-आ'ला) के फ़रिश्तों की बात नहीं सुन सकते, तथा वे हर ओर से (उल्काओं से) मारे जाते हैं।
भगाने के लिए। तथा उनके लिए स्थायी यातना है।
परंतु जो कोई (शैतान फरिश्तों की किसी बात को) अचानक उचक ले जाए, तो एक दहकता हुआ अंगारा (उल्का)1 उसका पीछा करता है।
तो आप इन (काफ़िरों) से पूछें कि क्या इन्हें पैदा करना अधिक कठिन है या उनका जिन्हें1 हम पैदा कर चुके? निःसंदेह हमने उन्हें2 एक लेसदार मिट्टी से पैदा किया है।
बल्कि आपने आश्चर्य किया और वे उपहास करते हैं।
और जब उन्हें नसीहत की जाए, तो वे क़बूल नहीं करते।
और जब वे कोई निशानी देखते हैं, तो खूब उपहास करते हैं।
तथा कहते हैं कि यह तो मात्र खुला जादू है।
क्या जब हम मर गए और मिट्टी तथा हड्डियाँ हो चुके, तो क्या सचमुच हम अवश्य उठाए जाने वाले हैं?
और क्या हमारे पहले बाप-दादा भी (उठाए जाएँगे)?
आप कह दीजिए : हाँ! तथा तुम अपमानित (भी) होगे!
वह बस एक ही झिड़की होगी, तो एकाएक वे देख रहे होंगे।
तथा वे कहेंगे : हाय हमारा विनाश! यह तो बदले का दिन है।
यही निर्णय का दिन है, जिसे तुम झुठलाया करते थे।
(आदेश होगा कि) इकट्ठा करो उन लोगों को जिन्होंने अत्याचार किया तथा उनके साथियों को और जिनकी वे उपासना किया करते थे ।
अल्लाह के सिवा। फिर उन्हें जहन्नम की राह दिखा दो।
और उन्हें ठहराओ1, निःसंदेह वे प्रश्न किए जाने वाले हैं।
तुम्हें क्या हुआ कि तुम एक-दूसरे की सहायता नहीं करते?
बल्कि, आज वे सर्वथा आज्ञाकारी हैं।
और वे एक-दूसरे की ओर रुख़ करके परस्पर प्रश्न करेंगे।1
वे कहेंगे : निःसंदेह तुम हमारे पास दाहिने1 से आया करते थे।
वे1 कहेंगे : बल्कि तुम (स्वयं) ईमान वाले न थे।
तथा हमारा तुमपर कोई ज़ोर1 न था, बल्कि तुम (स्वंय) हद से बढ़ने वाले लोग थे।
तो हमपर हमारे पालनहार का कथन सिद्ध हो गया। निःसंदेह हम निश्चय (यातना) चखने वाले हैं।
तो हमने तुम्हें गुमराह किया। निःसंदेह हम स्वयं गुमराह थे।
तो निश्चय ही वे उस दिन यातना में सहभागी होंगे।
निःसंदेह हम अपराधियों के साथ ऐसा ही किया करते हैं।
निःसंदेह वे ऐसे लोग थे कि जब उनसे कहा जाता कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य (इबादत के योग्य) नहीं, तो वे अभिमान करते थे।
तथा कहते थे : क्या सचमुच हम अपने पूज्यों को एक दीवाने कवि के कारण छोड़ देने वाले हैं?
बल्कि वह सत्य लेकर आए हैं तथा उन्होंने सभी रसूलों की पुष्टि की है।
निःसंदेह तुम निश्चय दुःखदायी यातना चखने वाले हो।
तथा तुम्हें केवल उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम किया करते थे।
परंतु अल्लाह के ख़ालिस (विशुद्ध) किए हुए बंदे।
यही लोग हैं, जिनके लिए निर्धारित रोज़ी है।
प्रत्येक प्रकार के फल। तथा वे सम्मानित किए गए हैं।
नेमत के बाग़ों में।
तख़्तों पर आमने-सामने बैठे होंगे।
उनपर प्रवाहित शराब के प्याले फिराए जाएँगे।
जो सफ़ेद होगी, पीने वालों के लिए स्वादिष्ट होगी।
न उसमें कोई सिरदर्द होगा, और न वे उससे मदहोश होंगे।
तथा उनके पास दृष्टि नीची रखने वाली, बड़ी आँखों वाली स्त्रियाँ होंगी।
मानो वे छिपाकर रखे हुए अंडे हों।1
फिर वे एक-दूसरे के सम्मुख होकर आपस में प्रश्न करेंगे।
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