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Ash-Shu'ara
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The Poets
लूत की जाति ने रसूलों को झुठलाया।
जब उनके भाई लूत ने उनसे कहा : क्या तुम डरते नहीं हो?
निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।
अतः तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।
मैं इस (कार्य) पर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता, मेरा बदला तो केवल सारे संसारों के पालनहार पर है।
क्या सभी संसारों में से तुम पुरुषों के पास आते1 हो।
तथा उन्हें छोड़ देते हो, जो तुम्हारे पालनहार ने तुम्हारे लिए तुम्हारी पत्नियाँ पैदा की हैं। बल्कि तुम हद से आगे बढ़ने वाले लोग हो।
उन्होंने कहा : ऐ लूत! निःसंदेह यदि तू नहीं रुका, तो निश्चित रूप से तू अवश्य निष्कासित लोगों में से हो जाएगा।
उसने कहा : निःसंदेह मैं तुम्हारे काम से सख़्त घृणा करने वालों में से हूँ।
ऐ मेरे पालनहार! मुझे तथा मेरे घर वालों को उससे बचा ले, जो ये करते हैं।
तो हमने उसे और उसके सभी घर वालों को बचा लिया।
सिवाय एक बुढ़िया1 के, जो पीछे रहने वालों में से थी।
फिर हमने दूसरों को विनष्ट कर दिया।
और हमने उनपर ज़ोरदार बारिश1 बरसाई। तो उन लोगों की बारिश बहुत बुरी थी, जिन्हें डराया गया था।
निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर ईमानवाले नहीं थे।
और निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् है।
ऐका1 वालों ने रसूलों को झुठलाया।
जब उनसे शुऐब ने कहा : क्या तुम डरते नहीं हो?
निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।
अतः तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।
मैं इस (कार्य) पर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता, मेरा बदला तो केवल सारे संसारों के पालनहार पर है।
नाप पूरा दो और कम देने वालों में से न बनो।
और सीधे तराज़ू से तोलो।
और लाेगों को उनका सामान कम न दो। और धरती में उपद्रव फैलाते मत फिरो।
सूरह समाप्त
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पूर्वावलोकन
بِسْمِ ٱللَّهِ